ज्योतिष लेख

अक्षयतृतीया

Category: Education
Date: 18 Apr 2026

हमारे सनातन परंपरा में कुछ तिथियाँ ऐसी होती हैं, जो जीवन-दर्शन का जीवंत संदेश देती हैं। ऐसी ही एक परम पावन तिथि है अक्षय तृतीया। जिसे आखा तीज या अक्ती तीज के नाम से जाना जाता है। इस पर्व में अक्षय शब्द का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो, अर्थात् जो सदा बना रहे, जो अनंत हो। यही कारण है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान, सेवा, हवन या कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करने वाला माना गया है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व आत्मिक उन्नति, धर्म, सेवा और सद्कर्म की कभी न समाप्त होने वाली परंपरा का स्मरण कराता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि कालचक्र के परिवर्तन की साक्षी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार-

युगादि तिथि: अक्षय तृतीया के दिन ही सतयुग का समापन हुआ था और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था।

परशुराम जयंती: भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम का प्राकट्य इसी तिथि को हुआ था।

गंगा अवतरण: भगीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा इसी दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं l

अक्षय पात्र की प्राप्ति: महाभारत काल में पांडवों के वनवास के दौरान, सूर्यदेव ने उन्हें अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिससे उन्हें कभी अन्न की कमी नहीं हुई।

सुदामा और कृष्ण का मिलन: द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता का नाश इसी तिथि को किया था।

 कब है  अक्षय तृतीया 

द्रिक पंचांग के अनुसार, वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल 2026 को प्रातः 10 बजकर 49 मिनट पर होगा और समापन 20 अप्रैल 2026 को प्रातः 7 बजकर 27 मिनट पर होगा। 

अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। अर्थात् इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।
विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नया व्यापार आरंभ, वाहन क्रय, आभूषण खरीदना जैसे सभी कार्य इस दिन स्वतः सिद्ध माने जाते हैं। 

अक्षय तृतीया पर दान का महत्व

हमारे सनातन धर्म मे अक्षय तृतीया पर दान का महत्व कहीं अधिक है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन किया गया दान जातक के संचित पापों का क्षय करता है। अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान और अर्जित किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। सनातन परंपरा में ऐसा माना जाता है कि इस दिन दान करने से धन का ह्रास नहीं होता बल्कि दान से धन-संपदा में वृद्धि होती है।

 अन्न दान का महत्व :
अन्नदानम् परं दानम् अर्थात् अन्न को धार्मिक ग्रंथों में परब्रह्म कहा गया है। अक्षय तृतीया पर किसी भूखे को भोजन कराना साक्षात नारायण की सेवा के समान है। ग्रीष्म ऋतु का प्रारंभ होने के कारण इस दिन सत्तू, गुड़ और शीतल जल के दान का विशेष महत्व है।

 जल दान का महत्व : 
प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ी मानवता है। इस दिन मिट्टी के घड़े (कुंभ) में जल भरकर दान करने से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है।

 अन्य सामग्रियां :
वस्त्र दान:निर्धनों को तन ढकने के लिए वस्त्र दें।
गौ दान: ब्राह्मणों को गौदान करना आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
पादुका दान: इस तपती धूप में राहगीरों को जूते या चप्पल दान करना अत्यंत पुण्यकारी होता है।
 अक्षय तृतीया पर दान केवल वस्तु का त्याग नहीं है, बल्कि अहंकार का विसर्जन है। इसलिए अहंकार रहित दान करना चाहिए l  

अक्षय तृतीया पर क्या करें?

इस पावन दिवस पर निम्न धार्मिक कार्य विशेष रूप से किए जाते हैं-
श्री लक्ष्मीनारायण और कुबेर देवता की पूजा
गंगा या अन्य पवित्र तीर्थों में स्नान
हवन एवं वेद-स्वाध्याय
स्वर्ण, आभूषण या सिक्कों का क्रय
विवाह, गृह प्रवेश मुंडन जैसे मांगलिक कार्य
ब्राह्मणों एवं जरूरतमंदों को दान

पूजन विधि

अक्षय तृतीया का पर्व भगवान विष्णु के लक्ष्मीनारायण स्वरूप को समर्पित है। इस दिन भक्त ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों में स्नान करें। यदि संभव न हो, तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
स्नान के पश्चात हाथ में जल लेकर व्रत या विशेष पूजा का संकल्प लें।
भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमा को पीले पुष्प, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। पूरे मन के साथ पूजा करें।
इस दिन भगवान को सत्तू, ककड़ी, चने की दाल और फलों का भोग लगाएं।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र या किसी भी इष्ट मंत्र का यथाशक्ति जप करें।
 

संसार में सब कुछ नश्वर है, सिवाय हमारे द्वारा किए गए सत्कर्मों के। सोना खरीदना समृद्धि का प्रतीक है, लेकिन किसी दुखी के आंसू पोंछना और किसी भूखे को अन्न खिलाना उस समृद्धि को ‘अक्षय’ बनाता है। इस आखा तीज, हम केवल अपने लिए वैभव न मांगें, बल्कि संसार के समस्त प्राणियों के कल्याण की कामना करें। अपनी आत्मा को जाग्रत करें और सेवा, सुमिरन व समर्पण के पथ पर आगे बढ़ें। ईश्वर से प्रार्थना है कि इस अक्षय तृतीया पर सभी के जीवन में धर्म का दीप, सेवा की भावना और पुण्य का अक्षय प्रवाह सदैव बना रहे।

WhatsApp Chat Icon